Chandrayaan 2:देखिये कैसे चाँद पर अँधेरा होने के साथ-साथ विक्रमलैंडर से संपर्क साधने की आशाएं भी खत्म होती जा रही हैं

Chandrayaan 2- विक्रमलैंडर से सम्पर्क स्थापित करने की आशाएं प्रतिघंटे कम होती जा रही है चाँद पर अंधेरा होने  लगा है और कुछ ही घंटों में दक्षिणी ध्रुव पूरा अंधेरे में हो जाएगा..

Chandrayaan 2:देखिये कैसे चाँद पर अँधेरा होने के साथ-साथ विक्रमलैंडर से संपर्क साधने की आशाएं भी खत्म होती जा रही हैं
chandrayaan2 dark on moon [vikram lander]

Chandrayaan 2 vikram lander- चाँद की सतह पर अंधेरा छाने लगा है और कुछ ही घंटों में चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पूरी तरह से रात हो जायेगी और विक्रमलैंडर (vikram lander) रात के अंधेरे में खो जाएगा,इसरो के वैज्ञानिक अंतिम समय तक जी जान से मेहनत कर रहे थे विक्रमलैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए,रात का अंधेरे नही बल्कि विक्रमलैंडर के ऊर्जा की श्रोत जा रही है और सम्पर्क स्थापित करने के लिए विक्रमलैंडर को लगातार ऊर्जा मिलती रहनी चाहिए विक्रमलैंडर का ऊर्जा का स्रोत सूर्य है.

चन्द्रमा पर कितने दिनों तक रहेगा अंधेरा


चन्द्रमा की सतह पर धीरे धीरे पूरी तरह से अंधेरा छा रहा है लेकिन यह अँधेरा सिर्फ दक्षिणी ध्रुव जहाँ विक्रमलैंडर है
  और ये अँधेरा 20-21 सितम्बर से 14 दिनों तक रहेगा यानी कि 20-21 सितम्बर से चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर पूरी तरह से रात हो जाएगी अभी अँधेरा होने लगा है जानकारी के लिए बता दें कि चन्द्रमा का एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है.

   अगले 14 दिनों तक चाँद के सतह पर अँधेरा होने के साथ साथ ठंढ भी रहेगी जी हां चन्द्रमा के सतह पर दिन का तापमान जहाँ 150-180 डिग्री होता है वहीं रात का तापमान माइनस 180 डिग्री तक पहुँच जाता है ऐसे में विक्रमलैंडर (vikram lander) के ना सलामत रहने की भी आशंका है क्योंकि माइनस 180 डिग्री तापमान में विक्रमलैंडर पूरी तरह से भ्रस्ट भी हो सकता है.


Chandrayaan 2 मिसन को श्रीहरिकोटा से 22 जुलाई को लांच किया गया था और इस मिसन के सभी कार्यों को सम्पन्न होने में 48 दिनों का समय लगना था और 48 दिनों के बाद यानी 7 सितम्बर की सुबह 1:30-2:30 के बीच चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग होनी थी लेकिन चन्द्रमा की सतह से  बचीं लगभग 300 मीटर की दूरी पर ही इसरो वैज्ञानिकों का विक्रमलैंडर से संपर्क ही टूट गया और सम्पर्क टूटने से विक्रमलैंडर (vikram lander)दक्षिणी ध्रुव पर तंय स्थान से 500 मीटर दूर हार्डलैंडिंग हुई जिससे विक्रमलैंडर की सभी कर कार्य प्रणालियां बन्द हो गयी हैं उन्हीं कार्यप्रणालियों को फिर से एक्टिव करने के लिए इसरो और नासा दोनों मिलकर काम कर रहे थे लेेेकिन अब चाँद पर अंंधेरा होने लगा है 20-21 सितम्बर को पूरी तरह से रात हो जाएगी.

  चन्द्रमा की सतह से 100 km दूर चन्द्रमा के ऑर्बिट में चक्कर लगा रहा चन्द्रयान2 का ऑर्बिटर अब 7 सालों तक चन्द्रमा की जाँच के साथ साथ चन्द्रमा की फ़ोटो इसरो वैज्ञानिकों को भेजता रहेगा जानकारी के अनुसार बिना लैंडर के भी chandrayaan 2 मिसन 95 प्रतिसत सफल है

विक्रमलैंडर आज से रात में अँधेरे में ग़ुम होजयेगा अब 14 दिनों तक लैंडर भारी ठंड को झेलेगा ऐसे में लैंडर से संपर्क स्थापित कर पाना बेहद ही कठिन है अब माइनस 180 डिग्री तापमान को झेलकर बिलकुल सही रहा लैंडर तो फिर से कोशिश की जा सकती है विक्रमलैंडर से संपर्क स्थापित करने  की.

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